जब भक्त और भगवान एक हो जाते हैं! 🙏 |

By Prabhu Tak

Categories: Religion & Spirituality, Spirituality

जब भक्त और भगवान एक हो जाते हैं! 🙏 | भक्ति का सर्वोच्च शिखर क्या है? | Sant Ravidas Ji Amrit Vaniक्या भगवान तक पहुँचना ही सबसे बड़ी भक्ति है, या भगवान में ही विलीन हो जाना सच्ची भक्ति है? 🙏सतगुरु रविदास महाराज जी की अमृतवाणी हमें समझाती है कि जब तक मनुष्य के भीतर 'मैं' अर्थात अहंकार रहता है, तब तक भक्त और भगवान के बीच दूरी बनी रहती है।सतगुरु रविदास जी फरमाते हैं—"तोही मोही, मोही तोही, अंतरू कैसा।कनक कटिक, जल तरंग जैसा।"जैसे सोने और उससे बने कंगन में कोई भेद नहीं होता, जैसे लहर और जल एक ही हैं, वैसे ही सच्ची भक्ति में भक्त और प्रभु के बीच कोई भेद नहीं रह जाता।संत नामदेव जी कहते हैं—"नामे नाराइन नाही भेद।"संत कबीर जी फरमाते हैं—"राम कबीरा एक भए हैं।"✨ सच्ची भक्ति केवल भगवान को पाने का नाम नहीं, बल्कि अपने अहंकार को मिटाकर प्रभु के प्रेम में लीन हो जाने का मार्ग है।🙏 नाम-सिमरन से मिटता है 'मैं', प्रकट होता है 'वह'।अगर यह आध्यात्मिक संदेश आपके हृदय को शांति और प्रेरणा दे, तो इसे अपने परिवार और मित्रों के साथ जरूर शेयर करें।🙏 जय बंदी छोड़ की 🙏🙏 सतगुरु रविदास महाराज जी की जय 🙏#SantRavidasJi #SantRampalJi #RavidasVani #KabirDas #KabirVani #SantNamdev #NaamSimran #BhaktiMarg #SachiBhakti #NirgunBhakti #GodRealization #SpiritualWisdom #AdhyatmikGyan #HindiSpiritual #SantVani #Satguru #PrabhuBhakti #BhaktiShorts #SpiritualShorts #जयबंदीछोड़की

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